चौखट
चौखट के उस पार
वो खड़ी अकेली
कुछ सहमी सी
हर छोटी बात की
सफाई देती,,,,,,,,
जिंदगी के
टूटे टुकड़ों को समेटती
हर पल खुद से लड़ती
तो कभी,,,,,,,
आस भरी नज़रों से
हम औरतों को देखती
और ,,,,,,,
चौखट के इस पार
हम सब औरतों की
भारी तादाद
तमाशा देखती
बहुमत के साथ चलती
घिसी पिटी लकीरों को
पीटती ,,,,,,,
इर्ष्या की आग में जलती
सिर्फ,,,,,,,,
ऊपर वाले के नाम की
दुहाईयां देती
यहाँ,,,,,,,,,,
एक नारी दूसरी नारी
के सम्मान का हरण करती
अपनी जिम्मेदारी से भागती
और सिर्फ ,,,
पुरुषों पर दोषारोपण करती
यह भूल कर,,,
की कल,,,
हममें में से भी
कोई एक कभी
चौखट के उस पार
हो सकता है,,,,,,,,,
सिम्मी मैनी

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