Thursday, 12 January 2012

उम्मीद (expectation)

           उम्मीद  (expectation)

क्यों जुड़ जाती है उम्मीद?
जहाँ प्रेम होता है
क्यों गहरी होती है टीस?
जहाँ प्रेम होता है

कभी चाहा नहीं था उम्मीद
कि तुम मेरे दर पर आती
पर तुमने कब दबे पाँव 
दिल में घर कर लिया
पता ही नहीं चला


छीन लिए होशो हवास
और
लूट लिया दिल का चैन
खोल डाला पल भर में
लेन देन का बही खाता
और
पाई पाई का हिसाब
मांगने लगी तुम
कितना तन मन धन
किसे कब किया अर्पण
पहले कभी सोचा न था

कहते हैं
उम्मीद पर दुनिया कायम है
पर ऐ !उम्मीद
तुमने तो मेरा
सब कुछ लूट लिया
जब तक तुमसे
पहचान ना थी
तो जीना आसन था
और 
प्रेम रगों में बहता था
लहू के संग


जैसे ही तुम्हारी
 परछाई पड़ी मुझपर
मानो ख़ुशी को
ग्रहण लग गया
प्रेम हवा हो गया
बदले कि आग में
और
खून भी पानी बन गया

चलो निकलो बाहर
मेरे दिल से
कि मुझे तुम्हारी
ज़रुरत नहीं
तुमसे मिलने से पहले भी
मैं सिर्फ दिया करती थी
और अपनी नज़रों में
ऊँची उठ जाती थी
हाँ .....मुझे फिर से
वैसा ही बनना है

सिम्मी मैनी









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