कोई भी रिश्ता जब टूटने लगता है तो कमज़ोर व्यकि पूरी ज़िम्मेदारी सामने वाले पर डाल देता है ,,,,और समझदार व्यक्ति उसमें अपनी गलती को भी देखता है ,,,,,रिश्ते को जोड़ने का अर्थ बार बार किसी से दबना नहीं है परन्तु यह समझना है कि जो सामने वाले ने किया वह काम करने का तरीका गलत है ,,,,व्यक्ति गलत नहीं है ,,,,,,,,,रिश्ता जोड़ने का अर्थ कुछ भी सेहन करना नहीं है बल्कि समझदारी से परिस्थिति का सामना करना है ,,,,,,अपनी बात सामने रखना है ,,,,,ताली हमेशा दो हाथ से बजती है ,,,,,जब अहं आड़े आता है तो धन और रुतबे में मज़बूत से मज़बूत व्यक्ति भी बात करने की पहल नहीं करता ,,,,और बात बिगड़ जाती है ,,,,और जो व्यक्ति emotionally strong होता है वह बात करने की पहल करता है ,,,याद रहे जहाँ रिश्तों की भीख मांगनी पड़े उस रिश्ते की नीव कमज़ोर है ,,,,,रिश्ते की ज़रूरत जितनी आपको है उतनी ही सामने वाले को भी होनी चाहिए ,,,,,,,,,और अगर ऐसा नहीं है तो आप उसे अपना नहीं सामने वाले का नुक्सान समझिए ,,,,,,,आपको यह तसल्ली होनी चाहिए की कम से कम आपने पहल की ,,,,,यह आपकी ताकत है कमज़ोरी नहीं ,,,,,,,,,
सिमी मदन मैनी
सिमी मदन मैनी
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