आभार
मेरा यह कविता संग्रह समर्पित है मेरी माँ "श्रीमती कृष्णा चैकर" जी को। यह उन्ही की परवरिश ,संस्कारों और आशीर्वाद का नतीजा है कि मेरे मन में उपजे भाव आज आपके समक्ष एक कविता संग्रह के रूप में प्रस्तुत हैं। मेरी माँ एक आम गृहणी है और उनका सम्पूर्ण जीवन घर परिवार के इर्द गिर्द ही घूमता रहा। मुझे याद नहीं कि उन्होंने कभी मुझे आदर्शों और सिद्धांतों के बारे में बैठा कर सिखाया या समझाया हो। वह तो अपने आप में एक मिसाल है जिन्हें देख कर मैंने सब सीखा। उनकी सहनशीलता ,सन्तुष्टता , ईमानदारी और बिना किसी शर्त के प्रेम करने की भावना सराहनीय है। कठिन परिस्थितियों में वही अपनी दूरदर्शता से मेरा पथ प्रदर्शित करती रहीं और मैं सभी तरह की परिस्थितियों का सामना करती बस आगे बढ़ती चली गई।
सिम्मी मदन मैनी
मेरा यह कविता संग्रह समर्पित है मेरी माँ "श्रीमती कृष्णा चैकर" जी को। यह उन्ही की परवरिश ,संस्कारों और आशीर्वाद का नतीजा है कि मेरे मन में उपजे भाव आज आपके समक्ष एक कविता संग्रह के रूप में प्रस्तुत हैं। मेरी माँ एक आम गृहणी है और उनका सम्पूर्ण जीवन घर परिवार के इर्द गिर्द ही घूमता रहा। मुझे याद नहीं कि उन्होंने कभी मुझे आदर्शों और सिद्धांतों के बारे में बैठा कर सिखाया या समझाया हो। वह तो अपने आप में एक मिसाल है जिन्हें देख कर मैंने सब सीखा। उनकी सहनशीलता ,सन्तुष्टता , ईमानदारी और बिना किसी शर्त के प्रेम करने की भावना सराहनीय है। कठिन परिस्थितियों में वही अपनी दूरदर्शता से मेरा पथ प्रदर्शित करती रहीं और मैं सभी तरह की परिस्थितियों का सामना करती बस आगे बढ़ती चली गई।
सिम्मी मदन मैनी
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