संकल्प
या फिर चुम्बक
ना जाने कैसे
इतनी तेज़ रफ़्तार से
अपने जैसी परिस्थिती
मेरे जीवन में
खींच लाते हैं
हाँ !!
बिखरी जो पड़ी हैं
ढेरों परिस्थितियां
इस विस्तृत ब्रह्माण्ड में
अपने जैसे संकल्प के
इंतज़ार में,,,,,,,
इधर मैंने सोचा
और उधर पाया
अब तो अपने
हर विचार पर
नज़र रखती हूँ
जांचती रहती हूँ उन्हें
पल पल
कहीं भटक ना जायें
भूले से भी,,,,,
ना आ जाए कहीं
नफरत और बेचारगी
इस चंचल मन
और,,,,,,
तेज़ी से
दौड़ते दिमाग में
जानती हूँ
बस क्षण भर में उतरेगी
संकल्प से मिलती परिस्थिती
मेरे जीवन में
और फिर मैं
प्रभु से पूछूंगी
मेरे साथ ही ऐसा क्यों ?
और परमात्मा का
फिर वही पुराना जवाब
मुझसे क्या पूछती हो?
अपने संकल्पों से पूछो
अपने संकल्पों से पूछो
सिम्मी मैनी

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