Tuesday, 17 July 2012

रोटी

       रोटी

जब  प्रेम का आटा
लगाव के पानी में 
पड़ता है,,,,,,
तो,,,,,
माँ के हाथों में
आटे का पेडा  नहीं
संतान का भविष्य 
पनपता है

जब दुआओं का बेलन
भविष्य के पेड़े  पर
चलता है,,,,
तो,,,,
उम्मीद कि मंद आंच पर
रोटी के रूप में ....
हर माँ का सपना फलता है

माँ के शुद्ध संकल्पों की 
रोटी जब पकती है
तो ईश्वर भी उसपर
अपनी रहमत की
वर्षा करता है
माँ के भजनों का घी
जब रोटी में रचता है
तो,,,,,
पेट की नहीं
आत्मा की भूख 
तृप्त करता है

माँ के विचारों का
हर एक निवाला
किसी शख्स की
इंसानियत
तो किसी की
हैवानियत 
बयां करता है

अगर शुद्ध भाव से 
भरा हो निवाला 
तो प्रसाद का
और अगर,,,,
नफरत से भरपूर हो तो
आत्मा के लिए
विष का काम करता है

जब भी तवे पर सिकती 
रोटी देखती हूँ
तो जानती हूँ
आज मंद आंच पर
किसी का 
वजूद पकता है
वजूद पकता है
                        
सिम्मी मैनी 

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