Friday, 20 July 2012

ठीक तो है ना ?

   ठीक तो है ना ?

ज़रा रुकिए
मैं अभी मसरूफ हूँ       
अपने साथ 
बरसों बाद,,,,
खुद को देख रही हूँ
और,,,,
ठहर  कर
खुद से पूछ रही हूँ
सिम्मी !!!!!
तू ठीक तो है ना?

शरीर तो थका था मेरा
पर वो तो,,,,
सिर्फ इशारा था
बीमार तो मैं थी
सबका हाल चाल पूछती
सबको सहलाती 
समझाती ,,,
उनके घावों पर
मरहम लगाती
खुद को कैसे भूल गयीं?

आज वक़्त मिला
तो जाना
सबसे पहली जिम्मेदारी 
अपने लिए
अगर मैं ही ठीक नहीं तो
कैसे सम्भालूंगी उन्हें
जो अपने हैं

आज खुद को सहलाया
अपने घावों पर
प्रेम का मरहम लगाया
तो मेरा चोला भी 
साफ़ नज़र आने लगा
अब सोचा है
इस सफ़र में
घड़ी दो घड़ी रुक कर
अपना हाल चाल 
पूछ लिया करुँगी 
और दर्द से 
आज़ाद हो जाऊँगी
मेरा इरादा तो पक्का है
और ,,,
आपका क्या ख्याल है?

सिम्मी मैनी 

Thursday, 19 July 2012

संकल्प

    संकल्प       

यह मेरे संकल्प हैं
या फिर चुम्बक 
ना जाने कैसे
इतनी तेज़ रफ़्तार से
अपने जैसी परिस्थिती
मेरे जीवन में 
खींच लाते हैं
हाँ !!
बिखरी जो पड़ी हैं
ढेरों परिस्थितियां 
इस विस्तृत ब्रह्माण्ड में 
अपने जैसे संकल्प के 
इंतज़ार में,,,,,,,
इधर मैंने सोचा
और उधर पाया

अब तो अपने
हर विचार पर
नज़र रखती हूँ
जांचती रहती हूँ उन्हें
पल पल
कहीं भटक ना जायें
भूले से भी,,,,,
ना आ जाए कहीं 
नफरत और बेचारगी
इस चंचल मन 
और,,,,,,
तेज़ी से
दौड़ते दिमाग में 

जानती हूँ
बस क्षण भर में उतरेगी
संकल्प से मिलती परिस्थिती 
मेरे जीवन में
और फिर मैं 
प्रभु से पूछूंगी 
मेरे साथ ही ऐसा क्यों ?
और परमात्मा का
फिर वही पुराना जवाब
मुझसे क्या पूछती हो?
अपने संकल्पों से पूछो
अपने संकल्पों से पूछो 

सिम्मी मैनी 

Tuesday, 17 July 2012

रोटी

       रोटी

जब  प्रेम का आटा
लगाव के पानी में 
पड़ता है,,,,,,
तो,,,,,
माँ के हाथों में
आटे का पेडा  नहीं
संतान का भविष्य 
पनपता है

जब दुआओं का बेलन
भविष्य के पेड़े  पर
चलता है,,,,
तो,,,,
उम्मीद कि मंद आंच पर
रोटी के रूप में ....
हर माँ का सपना फलता है

माँ के शुद्ध संकल्पों की 
रोटी जब पकती है
तो ईश्वर भी उसपर
अपनी रहमत की
वर्षा करता है
माँ के भजनों का घी
जब रोटी में रचता है
तो,,,,,
पेट की नहीं
आत्मा की भूख 
तृप्त करता है

माँ के विचारों का
हर एक निवाला
किसी शख्स की
इंसानियत
तो किसी की
हैवानियत 
बयां करता है

अगर शुद्ध भाव से 
भरा हो निवाला 
तो प्रसाद का
और अगर,,,,
नफरत से भरपूर हो तो
आत्मा के लिए
विष का काम करता है

जब भी तवे पर सिकती 
रोटी देखती हूँ
तो जानती हूँ
आज मंद आंच पर
किसी का 
वजूद पकता है
वजूद पकता है
                        
सिम्मी मैनी