ठीक तो है ना ?
ज़रा रुकिए
मैं अभी मसरूफ हूँ
अपने साथ
बरसों बाद,,,,
खुद को देख रही हूँ
और,,,,
ठहर कर
खुद से पूछ रही हूँ
सिम्मी !!!!!
तू ठीक तो है ना?
शरीर तो थका था मेरा
पर वो तो,,,,
सिर्फ इशारा था
बीमार तो मैं थी
सबका हाल चाल पूछती
सबको सहलाती
समझाती ,,,
उनके घावों पर
मरहम लगाती
खुद को कैसे भूल गयीं?
आज वक़्त मिला
तो जाना
सबसे पहली जिम्मेदारी
अपने लिए
अगर मैं ही ठीक नहीं तो
कैसे सम्भालूंगी उन्हें
जो अपने हैं
आज खुद को सहलाया
अपने घावों पर
प्रेम का मरहम लगाया
तो मेरा चोला भी
साफ़ नज़र आने लगा
अब सोचा है
इस सफ़र में
घड़ी दो घड़ी रुक कर
अपना हाल चाल
पूछ लिया करुँगी
और दर्द से
आज़ाद हो जाऊँगी
मेरा इरादा तो पक्का है
और ,,,
आपका क्या ख्याल है?
सिम्मी मैनी

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