Tuesday, 25 April 2017

खुद के प्यार में पड़ जाना

   खुद के प्यार में पड़ जाना


कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

अपनी हर  अच्छी बुरी बात को
दिल से क़ुबूल करना
और अपनी हर कमी को
ताकत में बदलते जाना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़  जाना

टूट कर प्यार करना
काले बालों से झाँकती चाँदनी को
और चेहरे की महीन लक़ीरों  में छिपे
अनुभवों के चाँद को सराहना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

छोड़ कर,
बढ़ते वज़न की फ़िक्र को कहीं पीछे
मेरा ढोलक की थाप पर
बिंदास थिरकते जाना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

हवा में उड़ा देना
बढ़ती उम्र के अफ़साने को
बस  एक मासूम बच्चे की तरह
हँसना और  गुनगुनाना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

कितना प्रेरणादायक है
अपनी हर उपलब्धि  के फूल को ,
जीवन के गुलदस्ते में सजा कर
अपना जीवन पथ महकना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

हर रोज़ बोए जाना एक सपने का
दिल के बागीचे में
और उसके पनपने पर
मेरा गर्व से भर जाना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

कितना रोमांचक  है
नई नई जगहों की सैर करना
और नित नए अनुभवों का
जीवन ग्रंथ में जुड़ते जाना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

ज़माने तो बदलते थे
और बदलते रहेंगे
अच्छा है ज़िंदादिली से
बदलते ज़माने के  साँचे में ढल जाना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

कुछ नया करने या सीखने की
कोई उम्र नहीं होती
हर भोर की पहली किरण के साथ
खुद को यह समझाना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना

बेहतरीन है अपने साथ वक़्त बिताना
यह जान लेना की कोहीनूर हैं हम
और खुद को तराशने में
मसरूफ हो जाना
कितना प्यारा है
खुद के प्यार में पड़ जाना


सिम्मी मदन मैनी