ज़िंदगी कट तो जाएगी
बस यूँही चलते चलते
पर बात तो तब है
जब इसे ज़िंदादिली से
जिया जाए
आज जब इबादत के लिए हाथ उठे
तो मैंने खुदा से कहा कि
मुझ नाचीज़ पर बस
इतना करम करना
कि हर दम तोड़ते पल में मुझे
ज़िन्दगी नज़र आए
चोट तो हर बार सहते हैं हम और दर्द भी निखरता है
पर तुम भी…
बड़े कारीगर हो मेरे खुदा
मुझे तराशने को
कर्मों की छैनी और
वक़्त का हथौड़ा
तब तक चलाते हो मुझ पर
जब तक मुझे संवार कर
पत्थर से हीरा ना कर दो......