अहंकार
काम, क्रोध , मोह , लोभ और अहंकार सभी बड़े परिचित शब्द हैं ,,,,,,कहते है काम ,क्रोध , लोभ ,और मोह पर विजय प्राप्त करना सरल तो नहीं परन्तु नामुमकिन भी नहीं ,,,,अभ्यास और वैराग्य द्वारा इन पर विजय प्राप्त की जा सकती है ,,,,,परन्तु अहंकार एक ऐसा दोष है जो हर व्यक्ति के मन में कहीं किसी कोने में घर कर के बैठा है ,,,,अहंकार इतना सूक्षम है कि मनुष्य को उसके होने का आभास तक नहीं होता ,,,,,,शक्तिशाली होने का , बुद्धिमान होने का , धनी होने का , रिश्तों का , सुंदरता का , किसी गुण विशेष का , भक्त होने का , स्वभाव से विनम्र होने का , संस्कारी होने का यह सभी अहंकार है ,,,,विनम्रता का अहंकार भी मनुष्य को पतन की और ले जाता है ,,,, जीवन में घटने वाली सभी घटनाएं एक ऐसा आईना हैं जिसमें हम अपने अहंकार के दर्शन कर सकते हैं ,,,,,,,,दिन में ना जाने कितनी बार हम मैं शब्द का प्रयोग करते हैं ,,,,,,कोई भी रिश्ता , ओहदा , गुण ,रूप , ज्ञान सदा साथ रहने वाला नहीं है ,,,,जिस क्षण हममें इनमें से किसी भी बात का अहंकार उत्पन्न होता है ,हम पतन की और अग्रसर होते हैं ,,, बरसों पुराने रिश्ते पल में कांच की तरह बिखर जाते हैं , राजा रंक हो जाता है ,शक्ति क्षीण हो जाती है , रूप और गुण धूल में मिल जाते हैं और ज्ञान धरा का धरा रह जाता है ,,,,,,जिस प्रकार माँ अपनी संतान का मल मूत्र साफ़ करती है उसी प्रकार परमात्मा भी हमारे जीवन में अलग अलग परिस्थितियों से हमारा सामना कराते हैं जिससे हमारे मन में बैठा अहंकार लुप्त हो सके ,,,,,परमात्मा पहले सब कुछ देता है और फिर एक पिता की भांति अपनी संतान को परखता है कि उसकी दी हुई नियामत का हम कैसा प्रयोग करते हैं ,,,,हर चीज़ जो दिखाई और सुनाई देती है वह पूरा सच नहीं है ,,,,,सच उससे पार है ,,,,,और अहंकार का पर्दा हटने पर ही उसे देखा और महसूस किया जा सकता है ,,,,,,यदि वह देखता है कि उसके दिए ख़ज़ाने का अहंकारवश हमने सही प्रयोग नहीं किया तो दाता किसी भी समय अपनी दात हमसे वापिस ले सकता है ,,,,,,,,वह कब शक्तिशाली को निर्बल , ज्ञानी को अज्ञानी और , धनी को निर्धन बना दे कौन जाने ?,,,,,,,हर पल अपने अहंकार से बात करना ज़रूरी है ताकि इतना भान तो रहे कि वह सिर्फ दूसरों में ही नहीं बल्कि मेरे भीतर भी रहता है ,,,,वह बात अलग है की हम देख सिर्फ दूसरों में पाते हैं ,,,,,,
सिमी मदन मैनी